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एक तरफ आदिकाल से चली आ रही परंपरा टूटने का डर, तो दूसरी ओर कोरोना संक्रमण से जान का जोखिम। ऐसे में बीच का रास्ता क्या हो? औरंगाबाद में देव सूर्य मंदिर समिति और प्रशासन ने इसका समाधान खोज लिया है। मंदिर के सूर्य कुंड में इस बार छठ के मौके पर सिर्फ एक परिवार स्नान करके अर्घ्य दे पाएगा। किस परिवार को यह मौका मिलेगा, इसका फैसला मंदिर समिति और प्रशासन करेगा।

कोरोना संक्रमण के चलते इस बार सूर्य कुंड में छठ पर स्नान और अर्घ्य पर पाबंदी है। मंदिर भी 17 नवंबर से बंद कर दिया गया है। मंदिर के 21 गेट पर पुलिस फोर्स और मंदिर समिति के सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये हैं। एसडीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि छठ पर देव सूर्य मंदिर में लाखों श्रद्धालु जुटते हैं और वे तालाब में ही स्नान करते हैं। पानी में कोरोना संक्रमण ने फैले, इसलिए पाबंदी लगाई गई है।

बाहर से ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश के दर्शन

मंदिर में विराजे भगवान सूर्य के तीनों रूप ब्रह्मा, विष्णु और महेश के दर्शन श्रद्धालु बाहर से ही कर रहे हैं। यहां तक कि भोग भी बाहर से लगाया जा रहा है। मुख्य पुजारी सच्चिदानंद पाठक मंदिर के द्वार पर खड़े होकर श्रद्धालुओं का लाया प्रसाद दूर से ही भगवान को चढ़ाकर लौटा देते हैं।

इस बार नहीं लगा चार दिवसीय मेला
कोरोना के कारण देव के रानी तालाब के निकट छठ पूजा के मौके पर लगने वाला चार दिवसीय मेला इस बार नहीं लगाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार मेला नहीं लगने से स्थानीय कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

औरंगाबाद का देव सूर्य मंदिर।

पहला सूर्य मंदिर, जो पश्चिम मुखी है

देश के अधिकतर मंदिरों का मुख्य द्वार पूर्व की तरफ होता है, लेकिन देव सूर्य मंदिर पश्चिम मुखी है। पुजारी का कहना है कि पश्चिम मुखी दरवाजे का प्रमाण स्कंद पुराण में मौजूद है। मंदिर में सूर्य भगवान के तीन रूप हैं। पहला विष्णु, दूसरा महेश और तीसरा ब्रह्मा। तीनों लोक के स्वामी माने जाने वाले विष्णु तीसरे स्थान यानी संध्या समय के रूप में विराजे हैं।

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देव सूर्य मंदिर का कुंड, जहां छठ पर सार्वजनिक स्नान की इजाजत नहीं दी गई है।

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