Saturday, January 16, 2021
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भारत के उलट इंडोनेशिया में बुजुर्गों को नहीं, बल्कि कामकाजी आबादी को पहले लगेगी वैक्सीन; जानें क्यों?

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पूरी दुनिया में करीब 16 देशों में कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन शुरू हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइन के आधार पर प्रायोरिटी ग्रुप्स तय किए गए हैं। इस पर अमल करते हुए अमेरिका, ब्रिटेन समेत तमाम देशों में हेल्थवर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ बुजुर्गों को सबसे पहले वैक्सीन लगाई जा रही है।

भारत भी इसी अप्रोच से आगे बढ़ रहा है। जनवरी में जब वैक्सीनेशन शुरू होगा तो यहां भी हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और बुजुर्गों को सबसे पहले वैक्सीन लगाई जाएगी। सरकारी योजना के मुताबिक 30 करोड़ लोग इन ग्रुप्स में हैं, जिन्हें सबसे पहले वैक्सीन लगाई जाएगी।

इंडोनेशिया भी उन देशों में शामिल है, जहां इसी महीने वैक्सीनेशन शुरू हो रहा है। पर यहां थोड़ा ट्विस्ट है। उसने बुजुर्गों के बजाय कामकाजी आबादी को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। यानी हेल्थकेयर वर्कर्स और सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ कामकाजी आबादी को वैक्सीन लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य कोरोनावायरस के खिलाफ तेजी से हर्ड इम्युनिटी तक पहुंचना और इकोनॉमी को पटरी पर लाना है। यह नजरिया बाकी देशों से अलग है, इसलिए पूरी दुनिया की वैक्सीन विशेषज्ञ और अर्थशास्त्रियों की नजर इस पर है। आइए जानते हैं कि इंडोनेशिया ऐसा क्या और क्यों कर रहा है?

इंडोनेशिया में 18-59 वर्ष के लोगों को वैक्सीन पहले क्यों लगा रहे हैं?

  • इसकी मुख्य रूप से दो वजहें हैं। पहला, इंडोनेशिया में चीन की कंपनी सिनोवेक बायोटेक की वैक्सीन का इस्तेमाल होने वाला है। इंडोनेशिया का कहना है कि यह वैक्सीन बुजुर्गों पर कितनी असरदार है, इसका कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। ट्रायल्स 18-59 वर्ष के लोगों पर हुए हैं, इस वजह से उन्हें भी प्रायरिटी ग्रुप्स में रखा गया है।
  • दूसरा पहलू यह भी है कि इंडोनेशिया के ड्रग रेगुलेटर ने बुजुर्गों के वैक्सीनेशन प्लान को लेकर कोई सिफारिश नहीं की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिती नादिया तारमिजी ने कहा- ‘हम ट्रेंड के विपरीत नहीं जा रहे। हम रेगुलेटर की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं।’
  • इसे इस तरह समझ सकते हैं कि ब्रिटेन और अमेरिका ने फाइजर की वैक्सीन के साथ टीकाकरण शुरू किया है। इसके बाद ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड और अमेरिका में मॉडर्ना की वैक्सीन को वैक्सीनेशन में शामिल किया है। यह तीनों ही वैक्सीन सभी आयु वर्गों पर असरदार साबित हुई है। इसके मुकाबले सिनोवेक बायोटेक की कोरोनावैक पर ट्रायल्स सीमित आयु वर्गों पर हुए हैं।
  • दरअसल, इस दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश ने सिनोवेक के कोरोनावैक शॉट के 12.55 करोड़ डोज की डील की है। तीस लाख डोज का पहला बैच इंडोनेशिया पहुंच गया है। यानी वैक्सीनेशन इसी से शुरू होगा। एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन दूसरी तिमाही में और फाइजर की वैक्सीन तीसरी तिमाही में यहां पहुंचेगी।

क्या इससे इंफेक्शन फैलने से रोकने में मदद मिलेगी?

  • हां। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह संभव है। पर शायद इससे कोरोना से होने वाली मृत्यु दर पर कोई असर न हो। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में इंफेक्शियस डिसीज विभाग के प्रोफेसर पीटर कोलिंग्नन के मुताबिक, ‘इस समय कोई भी किसी एक अप्रौच को सही और दूसरी को गलत नहीं बता सकता।’
  • कोलिंग्नन का कहना है कि ‘इंडोनेशिया जो भी कर रहा है, वह अमेरिका और यूरोप के देशों से बहुत अलग है। इससे हमें पता चलेगा कि यह स्ट्रैटजी से यूरोप और अमेरिका के मुकाबले कितनी कारगर रहती है। वैसे भी इस समय इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।’
  • सिंगापुर में नेशनल यूनिवर्सिटी में योंग लू लिन स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर डेल फिशर के मुताबिक, ‘युवा कामकाजी ज्यादा एक्टिव, ज्यादा सोशल रहते हैं। यात्रा भी ज्यादा करते हैं। इंडोनेशिया की स्ट्रैटजी से कम्युनिटी ट्रांसमिशन को कम करने में मदद मिल सकती है।’
  • फिशर यह भी कहते हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि इंडोनेशिया की स्ट्रैटजी बेहतर है। बुजुर्गों को गंभीर रोग होने या उनकी मौत होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसी वजह से उन्हें प्रायरिटी ग्रुप्स में रखकर पहले वैक्सीन दी जा रही है। यह भी मेरे हिसाब से सही ही है।

क्या इंडोनेशिया की अप्रौच से जल्द हर्ड इम्युनिटी हासिल करने में मदद मिलेगी?

  • कुछ कह नहीं सकते। इंडोनेशिया सरकार को तो कम से कम यही लग रहा है। यह अप्रौच कहती है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्रिय लोगों के ग्रुप को पहले वैक्सीनेट करने से जल्द से जल्द हर्ड इम्युनिटी हासिल हो जाएगी।
  • इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्री बुदी गुनादी सादिकिन ने कहा कि देश को हर्ड इम्युनिटी हासिल करने के लिए 18.15 करोड़ लोगों यानी करीब 67% को वैक्सीनेट करना होगा। इसके लिए वैक्सीन के 42.7 करोड़ डोज लगेंगे। हर व्यक्ति को दो डोज और 15% वेस्टेज रेट भी ध्यान में रखना होगा। इसी वजह से युवा कामकाजी आबादी को वैक्सीनेशन प्रोग्राम में शामिल किया जा रहा है।
  • पर सभी विशेषज्ञ इस पर सहमत नहीं है। उनका कहना है कि इस दावे के पीछे कोई तार्किक आधार नहीं है। हमें यह नहीं पता कि वैक्सीनेट हो चुके लोग वायरस को ट्रांसमिट कर सकते हैं या नहीं? इस पर रिसर्च करने की जरूरत है। इंडोनेशियाई हेल्थ इकोनॉमिक एसोसिएशन के हसबुल्लाह थाब्रानी के मुताबिक वैक्सीनेशन के बाद भी वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा कायम रह सकता है।

क्या इंडोनेशिया की अप्रौच उसकी आर्थिक रिकवरी में मदद करेगी?

  • हां, शायद। कोरोनावायरस महामारी ने दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इंडोनेशिया को तगड़ा झटका दिया है। दो दशक से अधिक समय के बाद इंडोनेशिया ने भयानक मंदी देखी है। सरकार का अनुमान है कि अर्थव्यवस्था में 2.2% की गिरावट हुई है।
  • ऐसे में अर्थशास्त्री सोच रहे हैं कि 10 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने से अर्थव्यवस्था को जम्पस्टार्ट मिलेगा। न केवल खर्च बढ़ेगा, बल्कि प्रोडक्शन जैसी गतिविधियां भी रिकवर होंगी। इसका लाभ देश की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।
  • बैंक मंदिरी में इकोनॉमिस्ट फैजल रहमान के मुताबिक 18-59 साल के ग्रुप में खपत अन्य ग्रुप्स के मुकाबले अधिक रहती है। यह इकोनॉमिक रिकवरी को रफ्तार दे सकते हैं क्योंकि इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था में घरेलू खपत की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। पर उन्होंने चेताया भी कि अगर देश में कोरोना के केस बढ़े तो लोगों का आत्मविश्वास कम होने का खतरा भी होगा।

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Indonesia Coronavirus Vaccine Plan Explainer; Know Why 18 To 59 Age Bracket Get China Sinovac Biotech Vaccines First

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