12 बजते ही आतिशबाजी और संघर्ष का संकल्प, फिर नगर कीर्तन के लिए पालकी साहिब को सजाया

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कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों के लिए नए साल की शुरुआत सिंघु बॉर्डर पर ही हुई। 2020 की आखिरी रात सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के कई रंग नजर आए। आम दिनों में जहां दस बजे के बाद सिंघु पर माहौल काफी शांत हो जाता है, वहीं कल देर रात तक प्रदर्शन और नारेबाजी होती रही। युवाओं ने कृषि कानूनों पर आधारित कई नुक्कड़ नाटक किए। दिल्ली के भी कई परिवार नया साल मनाने सिंघु बॉर्डर पहुंचे थे।

12 बजते ही किसानों ने जमकर आतिशबाजी की और साथ ही किसान आंदोलन को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया। पटाखे फोड़ने वाले युवाओं को दूसरे किसानों ने समझाया कि यह साल हमारे लिए जश्न का नहीं, बल्कि संघर्ष का प्रतीक है। इसके बाद मोमबत्तियां जलाकर उन किसानों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने किसान आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई।

फिर पूरे इलाके की साफ-सफाई भी की गई ताकि नए साल की शुरुआत नगर कीर्तन से की जा सके। इसके लिए ताजा फूलों से पालकी साहिब को खूब सजाया गया।

किसानों ने नए साल की शुरुआत नगर कीर्तन से की। इसके लिए सिंघु बॉर्डर पर पालकी साहिब को फूलों से सजाया गया था।
सुबह होने वाले नगर कीर्तन और पालकी साहिब की झांकी के लिए रात भर पूरे इलाके की सफाई की गई और सड़कों को धोया गया।
युवाओं ने देर रात तक सिंघु बॉर्डर पर नुक्कड़ नाटक किए, जिनमें कृषि कानूनों से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में किसानों को बताया गया।
किसानों का साथ देने दिल्ली के कई लोग अपने परिवार के साथ सिंघु बॉर्डर पहुंचे और नए साल के जश्न में उनके साथ शामिल हुए।
किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाली किसानों को मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। इसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया।
रात के 12 बजते ही सिंघु बॉर्डर पर जमकर नारेबाजी हुई। नए साल में किसानों ने अपने आंदोलन को मजबूत करने का संकल्प लिया।
किसानों के साथ नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में युवा सिंघु बॉर्डर पहुंचे थे। इसमें लड़कियां भी शामिल रहीं।
नए साल के जश्न के लिए किसान देर रात तक जागते रहे। उन्होंने कई जगहों पर अलाव जलाए थे ताकि ठंड से बच सकें।
आंदोलन में शामिल किसान अपने घरों से दूर हैं। ऐसे में कई किसानों ने अपनी ट्रैक्टर- ट्रॉली को सजाकर नए साल का आगाज किया।

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फोटो 31 दिसंबर की रात में सिंघु बॉर्डर पर ली गई है। 12 बजते ही किसानों ने आतिशबाजी शुरू कर नए साल का स्वागत किया। साथ ही मोमबत्तियां जलाकर उन किसानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आंदोलन में अपनी जान गंवाई है।

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