Wednesday, January 27, 2021
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ISRO के स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के डायरेक्टर बोले- गगनयान के पेलोड और सेंसर अहमदाबाद में बन रहे, यहीं से कंट्रोल होगा

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भारत का पहला मानव अंतरिक्ष यान, यानी गगनयान 2022 में लॉन्च किया जाएगा। इसके जरूरी पेलोड, केबिन, एयर और ऑक्सीजन प्रेशर, साथ ही टेम्परेचर कंट्रोल करने वाले सेंसर गुजरात के अहमदाबाद के ISRO सेंटर में बनाए जा रहे हैं। यह यान इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लिकेशन सेंटर से कंट्रोल होगा। यह जानकारी इस केंद्र के हाल ही में नियुक्त किए गए डायरेक्टर नीलेशभाई देसाई ने दी है। दैनिक भास्कर ने उनसे खास बातचीत की है। पेश है उसी के कुछ अंश…

बतौर साइंटिस्ट आप लो-प्रोफाइल रहते हुए काम के प्रति समर्पित रहे, लेकिन आज दैनिक भास्कर पाठकों तक आपकी सक्सेज स्टोरी पहुंचाना चाहता है। आप अपनी सक्सेज स्टोरी के बारे में क्या कहेंगे?
सक्सेज स्टोरी तो कुछ नहीं है। मेरा मानना है कि परिणाम के बारे में सोचे बिना लगन और मेहनत के साथ अपना काम करते रहना चाहिए। वैसे मैं मूल रूप से नवसारी का रहने वाला हूं। स्कूली पढ़ाई नवसारी से करने के बाद इंजीनियरिंग के लिए अहमदाबाद आया और फिर यहीं का होकर रह गया। मैंने एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। आखिरी सेमेस्टर के दौरान ही मेरी ISRO में नियुक्ति हो गई थी।

भारतीय पोजिशनिंग एंड नेविगेशन सिस्टम NaviC

इसरो के साथ सफर के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
किसी भी रिसर्च के लिए बहुत धैर्य रखना चाहिए। मैंने यह पाठ ISRO से ही सीखा और अब भी यहां से बहुत कुछ सीख रहा हूं।

ISRO से जुड़े किसी स्पेशल प्रोजेक्ट के बारे में बताना चाहेंगे?
प्रोजेक्ट तो कई रहे, लेकिन एक ‘नाविक’ प्रोजेक्ट को लेकर कहना चाहूंगा। दरअसल प्रोजेक्ट का ‘नाविक’ नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही सुझाया था। यह इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है। नाविक का अर्थ होता है नाव चलाने वाला, यानी नेविगेटर। मोदी साहब के सुझाए इस नाम को हमने अंग्रेजी में नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टलेशन यानी कि NaviC बनाया। यह एक क्रांतिकारी सिस्टम है।

नाविक सिस्टम के बारे में कुछ बताना चाहेंगे?
यह सिस्टम देश की करीब 2700 ट्रेनों में लगाया जा चुका है और करीब 6000 ट्रेनों में लगाने की योजना है। इससे शताब्दी, राजधानी जैसी कई फास्ट ट्रेनों की लोकेशन की ट्रेसिंग आसान हो जाती है। इससे ट्रैफिक, रूट चार्ज का एडमिनिस्ट्रेशन आसान और सुरक्षित हो जाता है। आने वाले समय में रेलवे ट्रैफिक का सारा कंट्रोल इसी सिस्टम के आधार पर आटोमैटिक किए जाने की योजना है।

भारत का गगनयान मिशन रूस के सहयोग से 2021 में शुरू किया जाना है। पहले इसे बिना क्रू के स्पेस में भेजा जाएगा। इसके अगले ही साल 2022 में इसमें अंतरिक्ष यात्री जाएंगे।

अभी किसी महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं?
अभी गगनयान मिशन का प्रोजेक्ट चल रहा है। इससे इंसान को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह यान पृथ्वी से 435 किलोमीटर ऊपर स्थापित किया जाएगा। यह बहुत कठिन काम है, क्योंकि इसमें अंतरिक्ष यात्री का पृथ्वी से सेकंड-टू-सेकंड कॉन्टैक्ट रहना जरूरी है।

यह संपर्क किस तरह मुमकिन हो सकेगा। आसान शब्दों में बताइए
जैसे आसमान में उड़ान भर रहा विमान लगातार एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के साथ संपर्क में रहता है। वहीं, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर अपनी रडार स्क्रीन में विमान की पोजिशन चेक करता रहता है। अगर यह संपर्क टूट जाए तो पायलट आसमान में रास्ता भटक जाएगा और हादसे की आशंका बढ़ जाएगी। यही काम हमें अंतरिक्ष यान के लिए करना है, जहां हमें पूरे समय उसके संपर्क में रहना होगा।

इस मिशन में स्पेस एप्लिकेशन सेंटर, अहमदाबाद की क्या भूमिका है?
इस मिशन के लिए जरूरी पेलोड अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लिकेशन सेंटर में ही बन रहे हैं। इसके अलावा अंतरिक्ष यात्री का केबिन और उसके तापमान, प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल के सेंसर भी यहीं बन रहे हैं। इस पूरे कम्युनिकेशन की प्रोसेस भी यहीं से कंट्रोल की जानी है।

स्टूडेंट्स का साइंस में इंट्रेस्ट कम हो रहा है, इसे आप किस तरह देखते हैं?
ISRO के अलावा अन्य संस्थाएं जैसे कि PRL और साइंस सिटी स्टूडेंट्स के साथ विज्ञान संबंधी बातचीत, क्विज, प्रोजेक्ट कॉम्पटीशन करते हैं। इसमें भावनगर में हुए एक कार्यक्रम के दौरान मैंने अनुभव किया था कि विज्ञान को लेकर गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवार के स्टूडेंट्स की रुचि ज्यादा होती है।

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ISRO के अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के डायरेक्टर नीलेशभाई देसाई कहते हैं- परिणाम के बारे में सोचे बिना लगन और मेहनत से अपना काम करते रहना चाहिए।

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